Navigation

Account

Social

3. तृतीय चैत्यवंदन: श्री रायण पगलिया चैत्यवंदन (Third Chaityavandan: Rayan Pagla)

Dedicated to the chief disciple and grandson of Lord Adinath, who achieved salvation here. :

शांतिनाथ भगवान 16वें तीर्थंकर हैं। उन्हें "मृग लांछन" और "कंचन वर्णी काया" वाला बताया गया है।

श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र की यात्रा और पाँच चैत्यवंदनों को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से तीर्थयात्री जीवन के परम लक्ष्य - - की प्राप्ति की ओर अग्रसर होते हैं।

"हे शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र! आपके दर्शन मात्र से दुर्गति का नाश होता है। जो भी भव्य जीव भावपूर्वक इस पर्वत पर चढ़ता है, वह संसार सागर से पार उतर जाता है।" Tattva Gyan